10th class student harsh signs rs 5cr mou for his drones

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हर्षवर्धन ने बताया कि उन्होंने लैंडमाइन का पता लगाने वाले ड्रोन के नमूने पर 2016 में ही काम शुरू कर दिया था और बिजनस प्लान भी बनाया था। हर्ष के मुताबिक, ‘ऐसा ड्रोन बनाने का आइडिया उस समय आया जब मैं टेलिविजन देख रहा था और पता चला कि हाथ से लैंडमाइन को निष्क्रिय करते वक्त बड़ी संख्या में सैनिक जख्मी होकर दम तोड़ देते हैं।’ उन्होंने अब तक ड्रोन के नमूने पर करीब 5 लाख रुपये खर्च किया है। पहले दो ड्रोन के लिए उनके अभिभावक ने करीब 2 लाख रुपये खर्च किया जबकि तीसरे नमूने के लिए राज्य सरकार की ओर से 3 लाख रुपये की मदद की गई है।

हर्षवर्धन ने बताया कि उन्होंने लैंडमाइन का पता लगाने वाले ड्रोन के नमूने पर 2016 में ही काम शुरू कर दिया था और बिजनस प्लान भी बनाया था। हर्ष के मुताबिक, ‘ऐसा ड्रोन बनाने का आइडिया उस समय आया जब मैं टेलिविजन देख रहा था और पता चला कि हाथ से लैंडमाइन को निष्क्रिय करते वक्त बड़ी संख्या में सैनिक जख्मी होकर दम तोड़ देते हैं।’ उन्होंने अब तक ड्रोन के नमूने पर करीब 5 लाख रुपये खर्च किया है। पहले दो ड्रोन के लिए उनके अभिभावक ने करीब 2 लाख रुपये खर्च किया जबकि तीसरे नमूने के लिए राज्य सरकार की ओर से 3 लाख रुपये की मदद की गई है।

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